जलेबी दी दो
बडे़ लोगों की बात कुछ अलग होती है। उनके बेटों की बात और भी अलग होती है। छोटे यानी गरीबों के बारे में आपको क्या कहना है? और उनके बच्चों की! कल मैं जब दफ्तर से घर जा रहा था...बारिश का दिन था........ उस मोड़ पर एक दुकान में गया........मेरा नम्बर तीसरा था। मेरे आगे दो बच्चे थे। जो लाईन में सबसे आगे खड़ा था, यूंही कुछ सात आठ बरस का होगा। जींस पैंट और टेडी बेयर वाली शर्ट पहने हुए, प्यारा सा लड़का। उसकी बगल में खड़ी एक युवती ने मुझे देखा और प्यारे से बच्चे की गाल पर थपकी दी। साफ- सुथरे बच्चे के पीछे ..........उसी के जैसा ........उसी हाईट का। गंदी- सी स्वेटर और फटी पैंट वाला, पी कैप पहने हुए। उसकी नाक भी गंदी थी। लेकिन आंखें साफ थी। एकदम साफ। पहला लड़का दुकानदार से ’’अंकल! आधा कीलो जलेबी देना’’...........और उसने दस- दस के चार नोट लाला जी को थमाए। दूसरा लड़का, ’’ ........पांच रुपये की देना’’ । लाला ने हड़काते हुए कहा , अबे पांच रुपये की क्या मिलेगी???? तपाक से लड़का बोला, तो क्या ये पैसे नहीं हैं? ’’ ’’स्कूल तो मेरा भाई जाता है। मैं भी जाऊंगा.........अभी तो परचून की दुकान पर काम करता हूं। हम यहां से (दिल्ली से) नहीं हैं। बापू.........? अच्छा उसने रिक्शा लिया है........किराये पर। मेरा नाम- मनोज। गांव- बिहार में है। मैं उससे बतिया रहा था। तब तक बगल वाली युवती मेरे आगे खड़ी थी। उससे भी आगे चार -पांच लोग लाईन में खडे़ हो गए। सब पावभर, आधा कीलो और कीलो तक जलेबी ले गए। कल बारिश का दिन था, सो मैंने मैले-कुचैले कपड़ों वाले किसी लड़के से पहली बार बात की होगी.......वर्ना ऐसे तो कई बच्चे घूमते- फिरते हैं। आप उनके नाम कहां तक पूछते फिरेंगे!
बडे़ लोगों की बात कुछ अलग होती है। उनके बेटों की बात और भी अलग होती है। छोटे यानी गरीबों के बारे में आपको क्या कहना है? और उनके बच्चों की! कल मैं जब दफ्तर से घर जा रहा था...बारिश का दिन था........ उस मोड़ पर एक दुकान में गया........मेरा नम्बर तीसरा था। मेरे आगे दो बच्चे थे। जो लाईन में सबसे आगे खड़ा था, यूंही कुछ सात आठ बरस का होगा। जींस पैंट और टेडी बेयर वाली शर्ट पहने हुए, प्यारा सा लड़का। उसकी बगल में खड़ी एक युवती ने मुझे देखा और प्यारे से बच्चे की गाल पर थपकी दी। साफ- सुथरे बच्चे के पीछे ..........उसी के जैसा ........उसी हाईट का। गंदी- सी स्वेटर और फटी पैंट वाला, पी कैप पहने हुए। उसकी नाक भी गंदी थी। लेकिन आंखें साफ थी। एकदम साफ। पहला लड़का दुकानदार से ’’अंकल! आधा कीलो जलेबी देना’’...........और उसने दस- दस के चार नोट लाला जी को थमाए। दूसरा लड़का, ’’ ........पांच रुपये की देना’’ । लाला ने हड़काते हुए कहा , अबे पांच रुपये की क्या मिलेगी???? तपाक से लड़का बोला, तो क्या ये पैसे नहीं हैं? ’’ ’’स्कूल तो मेरा भाई जाता है। मैं भी जाऊंगा.........अभी तो परचून की दुकान पर काम करता हूं। हम यहां से (दिल्ली से) नहीं हैं। बापू.........? अच्छा उसने रिक्शा लिया है........किराये पर। मेरा नाम- मनोज। गांव- बिहार में है। मैं उससे बतिया रहा था। तब तक बगल वाली युवती मेरे आगे खड़ी थी। उससे भी आगे चार -पांच लोग लाईन में खडे़ हो गए। सब पावभर, आधा कीलो और कीलो तक जलेबी ले गए। कल बारिश का दिन था, सो मैंने मैले-कुचैले कपड़ों वाले किसी लड़के से पहली बार बात की होगी.......वर्ना ऐसे तो कई बच्चे घूमते- फिरते हैं। आप उनके नाम कहां तक पूछते फिरेंगे!
