Tuesday, February 8, 2011

गोल......गोल..


बडे़ लोगों की बात कुछ अलग होती है। उनके बेटों की बात और भी अलग होती है। छोटे यानी गरीबों के बारे में आपको क्या कहना है? और उनके बच्चों की! कल मैं जब दफ्तर से घर जा रहा था...बारिश का दिन था........ उस मोड़ पर एक दुकान में गया........मेरा नम्बर तीसरा था। मेरे आगे दो बच्चे थे। जो लाईन में सबसे आगे खड़ा था, यूंही कुछ सात आठ बरस का होगा। जींस पैंट और टेडी बेयर वाली शर्ट पहने हुए, प्यारा सा लड़का। उसकी बगल में खड़ी एक युवती ने मुझे देखा और प्यारे से बच्चे की गाल पर थपकी दी। साफ- सुथरे बच्चे के पीछे ..........उसी के जैसा ........उसी हाईट का। गंदी- सी स्वेटर और फटी पैंट वाला, पी कैप पहने हुए। उसकी नाक भी गंदी थी। लेकिन आंखें साफ थी। एकदम साफ। पहला लड़का दुकानदार स,े ’’अंकल! आधा कीलो जलेबी देना’’............और उसने दस- दस के चार नोट लाला जी को थमाए। दूसरा लड़का, ’’ ........पांच रुपये की देना’’ । लाला ने हड़काते हुए कहा , अबे पांच रुपये की क्या मिलेगी???? तपाक से लड़का बोला, तो क्या ये पैसे नहीं हैं? ’’ ’’स्कूल तो मेरा भाई जाता है। मैं भी जाऊंगा.........अभी तो परचून की दुकान पर काम करता हूं। हम यहां से (दिल्ली से) नहीं हैं। बापू.........? अच्छा उसने रिक्शा लिया है........किराये पर। मेरा नाम- मनोज। गांव- बिहार में है। मैं उससे बतिया रहा था। तब तक बगल वाली युवती मेरे आगे खड़ी थी। उससे भी आगे चार -पांच लोग लाईन में खडे़ हो गए। सब पावभर, आधा कीलो और कीलो तक जलेबी ले गए। कल बारिश का दिन था, सो मैंने मैले-कुचैले कपड़ों वाले किसी लड़के से पहलह बार बात की होगी.......वर्ना ऐसे तो कई बच्चे घूमते- फिरते हैं। आप उनके नाम कहां तक पूछते फिरेंगे!

6 comments:

  1. यही सोच बनी रहे - हार्दिक शुभकामनाएं

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  2. यही सोच बनी रहे धन्यवाद|

    आप को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ|

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  3. bas yahi kahungi... hamesha isi taraf zamin se jude rehna :)

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  4. प्रोफाइल में लिखे शब्दों ने भी प्रभावित किया. स्वागत.

    सदाबहार देव आनंद

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  5. आदरणीय,

    आज हम जिन हालातों में जी रहे हैं, उनमें किसी भी जनहित या राष्ट्रहित या मानव उत्थान से जुड़े मुद्दे पर या मानवीय संवेदना तथा सरोकारों के बारे में सार्वजनिक मंच पर लिखना, बात करना या सामग्री प्रस्तुत या प्रकाशित करना ही अपने आप में बड़ा और उल्लेखनीय कार्य है|

    ऐसे में हर संवेदनशील व्यक्ति का अनिवार्य दायित्व बनता है कि नेक कार्यों और नेक लोगों को सहमर्थन एवं प्रोत्साहन दिया जाये|

    आशा है कि आप उत्तरोत्तर अपने सकारात्मक प्रयास जारी रहेंगे|

    शुभकामनाओं सहित!

    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’
    सम्पादक (जयपुर से प्रकाशित हिन्दी पाक्षिक समाचार-पत्र ‘प्रेसपालिका’) एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
    (देश के सत्रह राज्यों में सेवारत और 1994 से दिल्ली से पंजीबद्ध राष्ट्रीय संगठन, जिसमें 4650 से अधिक आजीवन कार्यकर्ता सेवारत हैं)
    फोन : 0141-2222225 (सायं सात से आठ बजे के बीच)
    मोबाइल : 098285-02666

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  6. अच्छी प्रस्तुति...
    हिन्दी ब्लाग जगत में आपका स्वागत है, कामना है कि आप इस क्षेत्र में सर्वोच्च बुलन्दियों तक पहुंचें । आप हिन्दी के दूसरे ब्लाग्स भी देखें और अच्छा लगने पर उन्हें फालो भी करें । आप जितने अधिक ब्लाग्स को फालो करेंगे आपके अपने ब्लाग्स पर भी फालोअर्स की संख्या बढती जा सकेगी । प्राथमिक तौर पर मैं आपको मेरे ब्लाग 'नजरिया' की लिंक नीचे दे रहा हूँ आप इसका अवलोकन करें और इसे फालो भी करें । आपको निश्चित रुप से अच्छे परिणाम मिलेंगे । धन्यवाद सहित...
    http://najariya.blogspot.com/

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